
नेशनल हाईवे पर बिना बैरियर वाली टोल व्यवस्था और नियमों के उल्लंघन पर ई-नोटिस मिलने से वाहन चालकों में ज्यादा अनुशासन देखा रहा है। गुजरात में एनएच-48 पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा इस नई व्यवस्था को लागू करने वाला देश का पहला टोल प्लाजा था।
चोर्यासी टोल प्लाजा पर ई-नोटिस की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। मई में जारी किए गए 1.7 लाख ई-नोटिस की तुलना में जून में यह संख्या घटकर 1.1 लाख और जुलाई में और भी कम होकर 92,240 रह गई।
वहीं, दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा पर यह प्रणाली 10 मई को शुरू की गई थी, जून माह में 1.69 लाख ई-नोटिस दर्ज किए गए थे। जुलाई में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा 1.67 लाख रहा।
पांच टोल प्लाजा पर मल्टीलेन फ्री फ्लो प्रणाली का संचालन
मल्टीलेन फ्री फ्लो यानी बैरियर-मुक्त टोल संग्रह प्रणाली वर्तमान में देश के पांच प्रमुख टोल प्लाजा पर संचालित हो रही है। इनमें गुजरात का चोर्यासी और दिल्ली का मुंडका टोल प्लाजा शामिल हैं।
इसके अलावा, दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित दौलतपुरा टोल प्लाजा पर जून के तीसरे सप्ताह में और दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित घरौंडा टोल प्लाजा पर जून के चौथे सप्ताह में यह प्रणाली शुरू की गई। दिल्ली-जयपुर हाईवे का मनोहरपुरा टोल प्लाजा इस व्यवस्था से जुड़ने वाला नवीनतम प्लाजा है, जहां 1 जुलाई से इसे लागू किया गया है।
नए टोल प्लाजा पर नियमों के उल्लंघन में भारी कमी
आंकड़ों से पता चलता है कि दौलतपुरा, घरौंडा और मनोहरपुरा में परिचालन के पहले महीने के दौरान जारी किए गए ई-नोटिस की संख्या चोर्यासी और मुंडका के शुरुआती आंकड़ों की तुलना में काफी कम रही। जुलाई के दौरान दौलतपुरा में केवल 33,038 ई-नोटिस जारी किए गए, जबकि घरौंडा में 86,760 और मनोहरपुरा में 70,550 ई-नोटिस दर्ज किए गए।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टोलिंग सिस्टम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जैसे-जैसे टोल का भुगतान न करने पर ई-नोटिस जारी होने के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, लोग नियमों का अधिक पालन कर रहे हैं। विशेष रूप से बिना सक्रिय फास्टैग वाले कार चालकों की एक बड़ी संख्या अब नियमों के दायरे में आ रही है।
समय पर भुगतान न करने पर दोगुना जुर्माना
इस नई प्रणाली के तहत नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई वाहन मालिक ई-नोटिस मिलने के 72 घंटों के भीतर टोल का भुगतान नहीं करता है या इसे चुनौती नहीं देता है, तो उसे दंड स्वरूप सामान्य टोल का दोगुना भुगतान करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, लंबे समय तक टोल का भुगतान लंबित रखने का असर वाहन संबंधी अन्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। लगातार अनदेखी करने वालों के लिए केंद्रीय वाहन पोर्टल से जुड़ी जरूरी सरकारी सेवाओं तक पहुंच को भी बाधित किया जा सकता है।



