
आश्विन माह के अंत में शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) का पर्व मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से साधक को जीवन में धन की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इस दिन देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए कई अनुष्ठान करने का विधान है। इन्हीं में शामिल है शरद पूर्णिमा की रात को जागरण करना। इससे साधक को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात को जागरण क्यों किया जाता है और इसके पीछे का क्या रहस्य है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
क्या है शरद पूर्णिमा की रात जागरण का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं। ऐसे में इस रात जो भक्त जागकर देवी का जागरण करते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। साथ ही साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, केवल शरद पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इस अमृत वर्षा में जागरण करने से साधक का मन शांत रहता है और मानसिक तनाव की समस्या दूर होती है। साथ ही सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
भागवत पुराण में बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात को ही वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात को भजन-कीर्तन करना अधिक फलदायी साबित होता है।
कब है शरद पूर्णिमा? (Sharad Purnima 2026 Date)
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत – 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि का समापन – 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।


