मेयर बोले-अधिकारी काम करना नहीं चाहते, एक काम के लिए कितनी बार फोन लगाए

मेयर ने कहा बैठक में भागीरथपुरा में उल्टी दस्त के मरीजों के मामले सामने आ रहे है। यह बात अफसरों को बताई गई थी। विधायक महेंद्र हार्डिया ने कहा कि गंदे पानी की समस्या भागीरथपुरा में नहीं कई बस्तियों में है। अफसर शिकायतों को हलके में लेते है।

भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड को लेकर अफसरों व जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। गुरुवार को एसईएस संजय दुबे की मौजूदगी में हुई बैठक में भी मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने यह बात दोहराई। उन्होंने कहा कि अफसर काम करना ही नहीं चाहते है। एक काम के लिए कितनी बार फोन करना पड़ेगा। इसकी सीमा तय कर दें। जरा-जरा सी बातों के लिए हम उपर फोन नहीं लगा सकते है।

उन्होंने दुबे से कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में काम करना मुश्किल है। मेयर ने कहा कि निगम में अधिकारियों की कमी नहीं है। जो अधिकारी है। वे ही ईमानदारी से काम कर लें तो हालात नहीं बिगड़ते। निगमायुक्त ने एक अपर आयुक्त को पांच-पांच विभाग दे रखे है,जबकि दूसरे अधिकारियों के पास काम नहीं है।

मेयर ने कहा कि कलेक्टर को रविवार को मैसेज किया था कि भागीरथपुरा में उल्टी दस्त के मरीजों के मामले सामने आ रहे है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। सोमवार के बाद अफसरों ने सक्रियता दिखाई। विधायक महेंद्र हार्डिया ने कहा कि गंदे पानी की समस्या भागीरथपुरा में नहीं कई बस्तियों में है। अफसर इस समस्या को हलके में लेते है। वे फोन नहीं उठाते। ये सबसे बड़ी समस्या है।

मंत्री विजयवर्गीय ने कहा इस घटना के लिए मैं खुद जिम्मेदार मानता हूँ

भागीरथपुरा में हुए दूषित पेयजल कांड को लेकर मंत्री विजयवर्गीय ने स्वीकारा कि इस घटना से शहर पर बदनुमा दाग गया है। वे इसके खुद को जिम्मेदार मानते है।हमारी सरकार है। गलती हमारे अधिकारी की है तो उसे हम भी अपनी जिम्मेदारी मानेंगे, लेकिन उसका मतलब यह नहीं कि मंत्री जाकर पाइप लाइन सुधारे। उन्होंने कहा कि मेयर और अफसरों के बीच तालमेल की कमी है। उसे भी दूर करेंगे।

पंद्रह दिन पहले कमिश्नर को भेजी थी कापी

विजयवर्गीय ने कहा कि वे इस शहर के जनप्रतिनिधि है। इस घटना के लिए वे खुद को भी जिम्मेदार मानते है। उन्होंने कहा रहवासी कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे कि भागीरथपुरा के पार्षद ने निगमायुक्त को इसकी शिकायत की थी। इसकी एक कापी उन्होंने मुझे दी थी। उसे भी मैने निगमायुक्त को भेज दिया था।

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