कब बना ICC और कैसे एक भारतीय ने बदल दी क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था की कहानी? 

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी। क्रिकेट की वो सर्वोच्च संस्था जो पूरे विश्व में इस खेल की देखरेख करती है। इस संस्था में क्रिकेट खेलने वाले लगभग हर देश शामिल हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि शुरुआत में सिर्फ तीन देशों के लिए ही इसका गठन हुआ था। इसका नाम भी कुछ और था। आज आपको बताते हैं आईसीसी के बनने और इसमें आए आर्थिक बदलाव का पूरा सफर।

क्रिकेट की वैश्विक संचालन संस्था की नींव दरअसल तीन देशों के लिए रखी गई थी और ये तीन देश थे इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका। इन तीनों देशों के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संबंधों को व्यवस्थित करने के लिए इस संस्था का गठन किया गया था और इसके पीछे थे दक्षिण अफ्रीका के मशहूर कारोबारी, क्रिकेट प्रशासक एबे बेली। बेली ने ही ये सुझाव दिया था।

बेली ने साल 1907 में इंग्लैंड के मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) पत्र लिखकर सुझाव दिया कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच अंतरराष्ट्रीय मैचों के बढ़ते कार्यक्रम की देखभाल और इसे व्यवस्थित तरीके से आयोजित कराने के लिए तीनों देशों की एक साझा संस्था होनी चाहिए। यहां से आईसीसी की शुरुआत हुई।

सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्य तक सीमित थी शुरुआती संरचना

आईसीसी का मतलब शुरुआत में वो नहीं था जो आज है। पहले इसे ‘इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस’ नाम दिया गया था। इसी नाम से पता चलता है कि शुरुआत में इसकी सदस्यता केवल ब्रिटिश साम्राज्य के देशों के लिए ही थी।

हालांकि, समय के साथ इसका विस्तार होता गया और बाकी के देश भी आ गए। साल 1926 में इसमें भारत, न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज को शामिल किया गया। बाद में पाकिस्तान, श्रीलंका और जिम्बाब्वे जैसे देश भी इसका हिस्सा बने।

1965 में इस संस्था का नाम बदल कर ‘इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस’ कर दिया गया। साल 1989 में एक बार फिर इसका नाम बदला और वो हुआ जो आज है। ये वही दौर था जब आईसीसी को ज्यादा अधिकार दिए गए जिससे वह एक सलाहकारी संस्था न रहते हुए निर्णायाक भूमिका भी निभा सके।

1993 में आया बड़ा बदलाव

साल 1993 इस संस्था के इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक मोड लेकर आया। यहां तक इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैस देश एक तरह से आईसीसी को चलाते थे, लेकिन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के बढ़ते कद के कारण अब इन दोनों देशों का प्रभाव कम हो गया और इन तीनों देशों का भी संस्था में अहल रोल रहने लगा।

ये वही साल था जब आईसीसी, एमसीसी के प्रशासनिक नियंत्रण से अलग हो गया था और अब इसका अपना एक स्वतंत्र सचिवालय, सीईओ होने लगा। बारबाडोस के सर क्लाइड वॉलकॉट आईसीसी के पहले गैर-ब्रिटिश अध्यक्ष बने।

भारतीय नेतृत्व और क्रिकेट का व्यावसायीकरण

आज आईसीसी के पास काफी पैसा है, लेकिन एक समय था जब आईसीसी की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छा नहीं थी। फिर एक भारतीय की एंट्री हुई और उसन सारा सिस्टम बदल दिया। 1990 के दौर तक आईसीसी की आय इसके सदस्य देशों से मिलने वाली फीस पर निर्भर थी। फिर भारत के जगमोहन डालमिया का एंट्री हुई और आईसीसी का ढांचा पूरी तरह से बदल गया।

1996 में भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से वर्ल्ड कप आयोजित किया और इसकी सफलता ने बता दिया की अब एशिया क्रिकेट का आर्थिक केंद्र है। साल 1997 में डालमिया आईसीसी के अध्यक्ष बने। पहली बार किसी भारतीय को ये पद मिला था। उन्हीं के अध्यक्ष रहते 1998 में बांग्लादेश में आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट आयोजित किया गया जो आगे चलकर चैंपियंस ट्रॉफी बना। इससे प्रसारण अधिकारों और स्पॉन्सरशिप के जरिए आईसीसी की आय में भारी वृद्धि हुई और संस्था आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बन गई।

इस तरह, तीन देशों की शुरुआती पहल से शुरू हुई यह संस्था आज विश्व क्रिकेट की सबसे शक्तिशाली शासी संस्था बन चुकी है, जिसने खेल को एक वैश्विक आर्थिक और सांस्कृतिक मंच में बदल दिया है।

आईसीसी में आए बड़े बदलाव

साल 2005 तक आईसीसी का मुख्यालय लंदन में था जिसे फिर दुबई स्थानांतरित कर दिया गया और अभी तक ये वहीं पर है।

साल 2005 में ही इंटरनेशनल विमन्स क्रिकेट काउंसिल का आईसीसी में विलय कर दिया गया।

आईसीसी से सदस्य देशों की संख्या इस समय 108 है जिनमें फुल मेंबर और एसोसिएट मेंबर शामिल हैं।

साल 1975 में आईसीसी ने पहला मेंस वर्ल्ड कप आयोजित किया और साल 2007 में पहला मेंस टी20 वर्ल्ड कप भी आयोजित किया।

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