
पानीपत के मतलौड़ा क्षेत्र में आने वाले वर्षों में होने वाले शहरी और औद्योगिक विस्तार को अब पहले से तय नियोजन व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। हरियाणा सरकार ने मतलौड़ा के आसपास के विस्तृत क्षेत्र को अतिरिक्त नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ क्षेत्र में अनियोजित निर्माण और बेतरतीब विस्तार की संभावनाओं पर अंकुश लगाने के साथ भविष्य की विकास जरूरतों के अनुरूप जमीन के इस्तेमाल का ढांचा तैयार किया गया है।
नए नियंत्रित क्षेत्र की खासियत यह है कि इसका दायरा केवल पानीपत जिले तक सीमित नहीं है। इसमें पानीपत, करनाल और जींद जिलों की साझा सीमाओं से जुड़े हिस्से तथा पहले से अधिसूचित नियंत्रित क्षेत्रों को एक नियोजित श्रृंखला में जोड़ा गया है। इससे मतलौड़ा और उसके आसपास के इलाके में भविष्य में होने वाले शहरी, औद्योगिक और व्यावसायिक विस्तार को व्यापक क्षेत्रीय योजना से जोड़ने का रास्ता साफ हुआ है।
तीन जिलों की सीमा से शुरू होगा नया विकास क्षेत्र
सरकार द्वारा तय सीमाओं के अनुसार नए नियंत्रित क्षेत्र का शुरुआती बिंदु वह त्रिसंधि स्थान है, जहां पानीपत, करनाल और जींद जिलों की सीमाएं मिलती हैं। यहां से क्षेत्र की सीमा पानीपत-करनाल की साझा सीमा के साथ आगे बढ़ती है।
यह सीमा बहोली स्थित ऑयल रिफाइनरी के आसपास पहले से अधिसूचित नियंत्रित क्षेत्र से जुड़ती है। इसके बाद नया क्षेत्र पानीपत में वर्ष 1982 में घोषित अतिरिक्त नियंत्रित क्षेत्र-2 और अतिरिक्त नियंत्रित क्षेत्र-3 तथा मतलौड़ा के वर्ष 2010 में अधिसूचित नियंत्रित क्षेत्र से जुड़ता हुआ आगे बढ़ता है। इस तरह पहले से नियोजित विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़कर एक बड़ा नियंत्रित विकास क्षेत्र तैयार किया गया है।
कॉलोनी से उद्योग तक जमीन के इस्तेमाल पर नियोजन की नजर
नए नियंत्रित क्षेत्र की घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव जमीन के भविष्य के इस्तेमाल पर पड़ेगा। अब इस दायरे में कॉलोनी विकसित करने, व्यावसायिक निर्माण, औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने, संस्थागत परियोजनाएं विकसित करने तथा मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों के लिए नियोजन व्यवस्था को ध्यान में रखना होगा।
सरकार ने क्षेत्र की विकास क्षमता को ध्यान में रखते हुए इसकी सीमाएं निर्धारित की हैं। क्षेत्र में भविष्य में भवन निर्माण के साथ औद्योगिक, वाणिज्यिक, संस्थागत और मनोरंजन संबंधी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाओं को भी आधार बनाया गया है। इसका उद्देश्य केवल निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि जमीन के इस्तेमाल को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थित करना है, ताकि क्षेत्र में होने वाला विस्तार बिना योजना के अलग-अलग दिशाओं में न फैले।
मतलौड़ा से जींद सीमा तक जुड़ेगा नियोजित विस्तार
नए क्षेत्र की दक्षिणी सीमा मतलौड़ा के पहले से अधिसूचित नियंत्रित क्षेत्र के साथ पश्चिम दिशा में आगे बढ़ती है। इसके बाद सीमा उस बिंदु तक पहुंचती है, जहां से पानीपत और जींद जिलों की साझा सीमा शुरू होती है। यहां से पानीपत-जींद की सीमा उत्तर दिशा में आगे बढ़ते हुए नए नियंत्रित क्षेत्र की पश्चिमी सीमा निर्धारित करती है। अंत में यह सीमा वापस शुरुआती त्रिसंधि बिंदु से जुड़ जाती है। इस तरह पूरा क्षेत्र एक निर्धारित सीमा के भीतर आ जाता है।
पुराने नियंत्रित क्षेत्रों से जोड़ी गई नई कड़ी
सरकार की योजना में पुराने अधिसूचित नियंत्रित क्षेत्रों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। बहोली स्थित ऑयल रिफाइनरी क्षेत्र, पानीपत के वर्ष 1982 में घोषित अतिरिक्त नियंत्रित क्षेत्र-2 व 3 और मतलौड़ा के वर्ष 2010 के नियंत्रित क्षेत्र को नए दायरे से जोड़ने से विकास के लिए एक निरंतर नियोजन क्षेत्र तैयार हुआ है।
इससे भविष्य में अलग-अलग हिस्सों में होने वाले विकास को एक-दूसरे से अलग रखने के बजाय क्षेत्रीय जरूरतों के मुताबिक देखने का आधार तैयार होगा।
13 जनवरी 2026 की ड्राइंग के आधार पर तय हुई सीमाएं
नए अतिरिक्त नियंत्रित क्षेत्र की सीमाएं सरकार ने 13 जनवरी 2026 की ड्राइंग संख्या डीटीपी (पीएन)-652/26 के आधार पर निर्धारित की हैं। अधिसूचना में बिंदुवार सीमाओं का उल्लेख करते हुए त्रिसंधि बिंदु से लेकर पानीपत-करनाल सीमा, बहोली रिफाइनरी क्षेत्र, पुराने नियंत्रित क्षेत्रों, मतलौड़ा क्षेत्र और पानीपत-जींद सीमा को नए दायरे में शामिल किया गया है।
मतलौड़ा क्षेत्र के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पानीपत-करनाल-जींद से जुड़ा यह इलाका भविष्य में औद्योगिक, वाणिज्यिक और शहरी गतिविधियों के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। नियंत्रित क्षेत्र की घोषणा के बाद विकास को जमीन की उपलब्धता के साथ-साथ नियोजन व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ाने का ढांचा तैयार हो गया है।



