टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 20 दिन से मुंबई में थे आरोपी, हमले के बाद ट्रेन से राजस्थान भागे

पिछले दो दशकों से मुंबई में अंडरवर्ल्ड के लगभग सभी बड़े गिरोह खत्म होने के बाद बॉलीवुड ने राहत की सांस ली थी। एक समय था जब ये गिरोह जबरन वसूली के जरिए फिल्म इंडस्ट्री से सबसे ज्यादा कमाई करते थे।

लेकिन रविवार शाम एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने यह साबित कर दिया है कि अंडरवर्ल्ड एक बार फिर नए चेहरों के साथ सक्रिय हो गया है। इस बार उत्तर भारत के गिरोह इस पुराने खालीपन का फायदा उठाने की कोशिश में हैं।

इस घटना ने एक बार फिर फिल्म जगत की हस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फायरिंग में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ
रविवार को जब अभिनेता टाइगर श्रॉफ जुहू में एक स्पोर्ट्स इवेंट से बाहर निकल रहे थे, तभी तीन अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चला दीं। गनीमत यह रही कि टाइगर श्रॉफ, जो कार में आगे बैठ थे, बाल-बाल बच गए। हालांकि, इस फायरिंग की चपेट में आने से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस घटना के कुछ ही मिनटों बाद, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनमोल बिश्नोई का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, जिसमें उसने इस गोलाबारी की जिम्मेदारी ली। इस घटना उस पुराने खौफनाक दौर की याद ताजा कर दी, जब हिंदी फिल्म उद्योग पूरी तरह से अंडरवर्ल्ड के साए में जीता था।

डर का वो पुराना दशक
1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत का समय बॉलीवुड के लिए किसी काले साये से कम नहीं था। उस दौर में जबरन वसूली और निजी दुश्मनी के कारण फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को लगातार निशाना बनाया जाता था।

मुकेश दुग्गल की हत्या (1997): फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की फिल्मों की फंडिंग को लेकर हुए विवाद के बीच एक गिरोह से जुड़ी झड़प में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

राजीव राय पर हमला (1997): छोटा शकील के शूटरों ने फिल्म निर्माता राजीव राय पर उनके तारदेव स्थित दफ्तर के बाहर जानलेवा हमला किया, जिन्हें उनके साथ मौजूद एक पुलिस कांस्टेबल ने जवाबी फायरिंग कर बचाया।

गुलशन कुमार की हत्या (1997): टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार को दिनदहाड़े वर्सोवा में गोलियों से भून दिया गया था। आरोप था कि यह हत्या अबू सलेम के इशारे पर हुई थी।

राकेश रोशन पर हमला (2000): सुपरहिट फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ की सफलता के तुरंत बाद सांताक्रूज ऑफिस के बाहर राकेश रोशन पर छोटा शकील के शूटरों ने हमला किया, लेकिन समय पर मिली मेडिकल मदद से उनकी जान बच गई।

अजीत दीवानी हत्याकांड (2001): मनीषा कोइराला के सेक्रेटरी अजीत दीवानी ने जब रंगदारी देने से मना किया, तो अबू सलेम के गुर्गों ने उनकी हत्या कर दी। इसके अलावा, ‘लगान’ की सफलता के बाद आमिर खान और आशुतोष गोवारिकर के अपहरण की साजिशों को भी नाकाम किया गया था।

90 के दशक के गैंग्स का अंत
उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री का दबाव इतना बढ़ गया था कि फिल्म हस्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर एमएन सिंह से मिलकर धमकी दी थी कि यदि सुरक्षा नहीं सुधरेगी, तो वे मुंबई छोड़कर हैदराबाद शिफ्ट हो जाएंगे।

राजनेताओं और इंडस्ट्री के भारी दबाव के बाद, मुंबई पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। एनकाउंटर पॉलिसी और महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) का कड़ाई से इस्तेमाल कर अंडरवर्ल्ड की कमर तोड़ दी गई। मुख्य सरगना या तो जेल भेजे गए या मार गिराए गए।

2002 में लिस्बन (पुर्तगाल) में गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम का आतंक समाप्त हुआ।

छोटा राजन को 2015 में बाली (इंडोनेशिया) से भारत लाया गया, और वर्तमान में वह उम्रकैद काट रहा है।

इसी प्रकार अरुण गवली की गिरफ्तारी के बाद उसके गिरोह का वजूद भी खत्म हो गया।

चेहरे बदले, आतंक वही
अंडरवर्ल्ड के पुराने खिलाड़ियों के खात्मे के बाद लगभग दो दशकों तक मुंबई शांत रही। पुलिस के पास जबरन वसूली की शिकायतें आनी बंद हो गईं थीं।

लेकिन, साल 2023 से हालात तेजी से बदलने लगे। उत्तर भारत में सक्रिय लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने अभिनेता सलमान खान को निशाना बनाना शुरू किया और बांद्रा स्थित उनके घर पर गोलियां चलाईं। इसके बाद अक्टूबर 2024 में इसी गैंग ने एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की सनसनीखेज हत्या कर दी।

हाल ही में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी सहित कई अन्य बॉलीवुड हस्तियों को भी फिरौती के लिए धमकियां मिली हैं। टाइगर श्रॉफ पर हुआ ताजा हमला इस बात की तस्दीक करता है कि बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का आतंक एक नए रूप में लौट आया है।

अब अंतर सिर्फ इतना है कि कल के मुंबई आधारित गैंग्स की जगह अब उत्तर भारत के नए अपराधियों ने ले ली है, जो एक बार फिर बॉलीवुड में डर का साम्राज्य कायम करना चाहते हैं।

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