Gen-z का अलग है रक्षाबंधन मनाने का तरीका; एक एक्टर की बहन कीमती तोहफा देखकर हुई नाराज

भाई-बहन का रिश्ता अटूट विश्वास और प्यार से जुड़ा होता है। समय के साथ यह रिश्ता और गहरा हुआ है, तो रक्षाबंधन मनाने का अंदाज भी बदला है। हिंदी सिनेमा के जेन जी कलाकार भी इसे अपने मॉडर्न अंदाज में मना रहे हैं। अब उपहारों की जगह साथ बिताए पल खास हो गए हैं और कैश की जगह यूपीआई ने ले ली है। सोशल मीडिया पर बचपन की तस्वीरों और खास पोस्ट के साथ सेलिब्रेशन शुरू होता है। जानिए, जेन जी कलाकारों के लिए कैसा है इस बार का रक्षाबंधन।

समय है सबसे बड़ा तोहफा

ऑपरेशन सफेद सागर और मुंज्या फिल्में कर चुके अभिनेता अभय वर्मा आगामी दिनों में शाह रुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे। रक्षाबंधन मनाने का तरीका उनका भले ही पारंपरिक है, लेकिन उपहार पारंपरिक नहीं है। उन्हें समय सबसे कीमती उपहार लगता है। अभय कहते हैं कि मेरी बहन गुरुग्राम में रहती हैं, वह हम तीनों भाई-बहनों में बड़ी हैं। उन तक पहुंचकर राखी बंधवाना ही सबसे बड़ा तोहफा है। तोहफे पैसों से खरीदे जा सकते हैं।

आज के दौर में सबसे बड़ा तोहफा हमारा समय है, जिसे खरीदा नहीं जा सकता है, केवल अपने परिवार को दिया जा सकता है। मैंने तो बहुत छोटी उम्र से काम करना शुरू कर दिया था, तो कई बार बहन के साथ रक्षाबंधन नहीं मना पाता था। हालांकि, हमारे पास वीडियो कॉल की सुविधा है, तो उस पर खूब राखियां बांधी हैं। लोग आजकल मस्कुलैनिटी यानी पौरुष की बात करते है। मेरा मानना है कि हम उतने ही सुंदर पुरुष बनते हैं, जितना हम अपने आसपास की महिलाओं को बेहतर समझते हैं। मैं और मेरी बहन एकदूसरे को समझते हैं।

हालांकि, मैं अपनी बहन के सामने आज भी वही छोटा बच्चा बन जाता हूं, जो उनसे कभी टीवी के रिमोट के लिए, चैनल बदलने के लिए या पहले खाना खाने जैसी बातों पर लड़ जाता था। आज भी 15-20 दिन के लिए अगर बहन के साथ रह गया, तो लड़ाई हो ही जाती है।

साधारण सा धागा ही काफी

डिजाइनरों से घिरे रहने वाली आज की पीढ़ी के कलाकार मिहिर आहूजा, रक्षाबंधन पर साधारण सा धागा बंधवाना पसंद करते हैं। हाल ही में ऑपरेशन सफेद सागर वेब सीरीज में दिखे अभिनेता मिहिर अपनी बड़ी बहन और मैनेजर से काफी कुछ सीख रहे हैं। मिहिर की बहन अपनी नौकरी के साथ उनका काम भी संभालती हैं। मिहिर उन्हें हैशटैग वन वुमन आर्मी और नोज इट ऑल (उन्हें सब पता है) देते हुए कहते हैं कि मेरी बहन मेरी ही रक्षा करती हैं।

पहले वो मेरे ऑडिशन के वीडियो बनाने में मेरी मदद करती थीं, अब मेरी मीटिंग्स अरेंज करने में मदद करती हैं। उनसे बेहतर मेरा काम कोई संभाल नहीं सकता है। रक्षाबंधन मनाने का तरीका आज भी मेरे लिए वही हैं, बस तोहफे मोबाइल में सिमट गए हैं। वैसे भी यह पीढ़ी त्योहार मनाने के मामले में बहुत समझदार है। रक्षाबंधन पर बहुत तामझाम करने की बजाय एक साधारण सा धागा बांधना ज्यादा बेहतर लगता है। मेरी बहन भी तोहफे ज्यादा पसंद नहीं करती हैं।

दुबई से मैं उनके लिए एक बहुत महंगा बैग लाया था, वह गुस्सा हो गईं थीं। आज की पीढ़ी पैसे बचत करने में और साधारण जीवन जीने में यकीन करती है। बाकी शगुन करने के लिए कैश दो या डिजिटली पैसे ट्रांसफर करो, एक ही बात है। मेरी बहन बिल्कुल मेरी मां की तरह हैं, जो अपने बच्चों के पैसे खर्च नहीं होने देती हैं। मुंबई में मेरी बहन साथ रहती हैं, ऐसे में पूरे दिन की थकान के बाद उनसे बात करके मन हल्का हो जाता है।

इस रक्षाबंधन मैं उनसे उनकी ही तरह मेहनती और मल्टीटास्कर बनने का आशीर्वाद चाहता हूं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनसे लड़ना छोड़ दूंगा। हम दोनों टॉम एंड जेरी (कार्टून) देखते हुए बड़े हुए हैं और वैसे ही लड़ते भी हैं।

इस बार राखी पर गिफ्ट देना नहीं, लेना है

फिल्म लापता लेडीज के अभिनेता स्पर्श श्रीवास्तव के लिए इस बार की राखी और खास है, क्योंकि रक्षाबंधन के दिन ही उनकी जन्मतिथि भी है। स्पर्श कहते हैं कि मैं आगरा से हूं और मेरी दो बहनें हैं। दोनों मेरे बड़े पापा की बेटियां हैं और वहीं रहती हैं। आमतौर पर रक्षाबंधन के दिन वह मुझे राखी भेजती हैं और मैं उनके लिए कुछ न कुछ गिफ्ट यहीं से ऑनलाइन बुक करके भेज देता हूं।

हालांकि, इस बार मामला थोड़ा अलग है। इस बार रक्षाबंधन के दिन ही मेरी जन्मतिथि भी पड़ रही है। (हंसते हुए) तो इस बार मैं अपनी बहनों को गिफ्ट दूंगा नहीं, बल्कि उनसे लूंगा। इस बार तो मैं बच जाऊंगा। मेरी मम्मी हर रक्षाबंधन पर मामा के लिए अपने हाथों से राखी बनाती हैं। वह पहले मामा को बंधती हैं, फिर हमें भी वही राखी बांधती हैं। वो राखी मेरे लिए बहुत खास होती है, वो रेशम के धागे की राखी होती है। इस बार भी बहनों की राखी के साथ मम्मी के हाथों की बनाई राखी जरूर पहनूंगा।

हाल ही में मेरी छोटी बहन का शादी हुई, उस समय मुझे एक भाई होने जिम्मेदारी और इस रिश्ते की अहमियत ज्यादा समझ में आई। उस समय शादी की सारी तैयारियों के बीच एक पल ऐसा आता है, जब आपकी बहन विदा हो रही होती है। तब बहन से जुड़ी भावनाएं बहुत ज्यादा दिल को छूती हैं। उस समय रक्षाबंधन और बहन से जुड़ी हर यादें मेरी आंखों के सामने तैरने लगी। बदलाव तो हमेशा होता है। हर नए दौर में त्योहारों को मनाने के तरीके बदल जाते हैं, लेकिन भावनाएं सौ साल पहले भी वही होती हैं और सौ साल बाद भी वही रहेंगी।

Related Articles

Back to top button