अजूबा या भ्रष्टाचार? हंगरी में खेत के बीच बना 1.5 मिलियन डॉलर का गोलचक्कर

पश्चिमी हंगरी के जालेगेर्सजेग में यूरोपीय संघ (EU) के 500 मिलियन फोरिंट (लगभग 1.5 मिलियन डॉलर) की लागत से एक ऐसा गोलचक्कर बनाया गया है, जो कहीं से कहीं नहीं जाता है। बल्कि वह वीरान खेतों के बीच अधूरा पड़ा है।

दरअसल, जालेगेर्सजेग में इस गोलचक्कर का निर्माण एक बड़े रेलवे कंटेनर टर्मिनल की सुविधा के लिए बनाया गया है। लेकिन जिस रेलवे लाइन से इसे जुड़ना था, उसका अभी अस्तित्व ही नहीं है। यह गोलचक्कर तब तक उपयोगी नहीं हो सकता है, जब हंगरी सरकार द्वारा रेलवे लाइन का निर्माण नहीं कराया जाता है।

चुनाव के समय में गरमाया मुद्दा
हंगरी में इस गोलचक्कर का मामला ऐसे समय में गरमाया है, जब संसदीय चुनाव हो रहा है और प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन पर आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि ओर्बन सरकार यूरोपीय संघ के धन का उपयोग विकास के बजाय चुनावी लाभ और दिखावटी निर्माणों के लिए कर रही है।

रविवार को होने वाले महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव से पहले, विरोधी यह सवाल उठा रहे हैं कि हंगरी ने इस सारे निवेश का क्या परिणाम दिखाया है, और वे कई ऐसी परियोजनाओं की ओर इशारा कर रहे हैं जिन्हें वे दिखावटी और अधूरी या अनावश्यक निर्माण परियोजनाएं बता रहे हैं। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दुनिया का एक ऐसा गोलचक्कर है जो कहीं से कहीं नहीं जाता है।

हंगरी सरकार पर लगे आरोप
प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के आलोचकों का कहना है कि यूरोपीय संघ द्वारा वित्तपोषित इस तरह की निर्माण परियोजनाएं उनकी सरकार द्वारा 16 वर्षों के कार्यकाल में निर्मित आर्थिक व्यवस्था का प्रतीक हैं। उनका कहना है कि ओर्बन की चुनावी सफलता का कारण यूरोपीय संघ को लगातार बदनाम करना – उसे हंगरी में एक पतित, उदारवादी और भ्रष्ट शक्ति के रूप में चित्रित करना और साथ ही उससे भारी मात्रा में धन स्वीकार करना है।

क्षेत्र की निवेश फर्म ओरिएन्स के संस्थापक क्रिज्टियन ओर्बन ने बताया कि 2010 के दशक में विक्टर ओर्बन यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा स्वार्थी व्यक्ति था। गोलचक्कर उसकी एक सोची-समझी रणनीति थी, क्योंकि ओर्बन ही एक मात्र यूरोपीय संघ से भारी मात्रा में धन जुटाने में सक्षम था।

हंगरी यूरोपीय संघ का सबसे भ्रष्ट देश
यही नहीं भ्रष्टाचार पर नज़र रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने हंगरी को यूरोपीय संघ का सबसे भ्रष्ट देश बताया है। सीएनएन ने इस मामले पर हंगरी के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से टिप्पणी मांगी है। हंगरी सरकार आमतौर पर भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारती है या अपने विरोधियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती है।

इस गोलचक्कर पर काम मौजूदा यूरोपीय संघ के बजट कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ, जो 2027 तक चलेगा। क्षेत्र में काम करने वाली लॉजिस्टिक्स कंपनी मेट्रांस ने जमीन का एक टुकड़ा खरीद लिया था और वह नई रेलवे लाइन से जुड़ने के लिए एक कंटेनर टर्मिनल बनाने की योजना बना रही थी, जिसका निर्माण भी निर्धारित है।

2021 में रखी गई आधारशिला
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने नए टर्मिनल की आधारशिला 2021 में रखी। 2023 के अंत तक, स्थानीय नगरपालिका ने यूरोपीय संघ के फंड की मदद से टर्मिनल के आसपास लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने के लिए गोलचक्कर का निर्माण कर लिया था। लेकिन अब तक यहां से होकर जाने वाले प्रस्तावित रेलवे का निर्माण नहीं शुरू हो सका है। ऐसे में अगर रेलवे लाइन का अभी भी निर्माण शुरू होता है तो अगले दो साल तक तैयार नहीं हो पाएगा और इस दौरान यह गोलचक्कर बेकार पड़ा रहेगा।

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