अमेरिका ने सख्त किए इमीग्रेशन रूल्स

 अमेरिका ने इमिग्रेशन से जुड़े फायदों के लिए प्रोसेसिंग के नियमों को सख्त कर दिया है। अब इमिग्रेशन अधिकारी वीजा, ग्रीन कार्ड, नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़े दूसरे फायदों के लिए अधूरे या बिना जरूरी दस्तावेजों वाले आवेदनों को बिना अतिरिक्त सबूत मांगे ही रिजेक्ट कर सकते हैं।

यह बदलाव तुरंत लागू हो गया है और इससे अमेरिका में पढ़ाई, काम या बसने की चाह रखने वाले हजारों भारतीय आवेदकों पर असर पड़ सकता है। यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने घोषणा की है कि आवेदकों को आवेदन करते समय ही इमिग्रेशन से जुड़े फायदे के लिए अपनी पात्रता साबित करनी होगी।

क्या कहता है नया नियम?

नए नियमों के तहत अगर आवेदन में सभी जरूरी शुरुआती सबूत नहीं हैं या पात्रता साबित नहीं होती है तो अधिकारी रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस (RFE) या नोटिस ऑफ इंटेंट टू डिनाई (NOID) जारी किए बिना ही अनुरोध को नामंजूर कर सकते हैं।

यूएससीआईएस ने कहा, “अनुरोध करने वाले की यह जिम्मेदारी है कि वह साबित करे कि आवेदन करते समय वह उस फायदे के लिए पात्र है और फैसले के समय भी उसकी पात्रता बनी हुई है।”

एजेंसी ने क्या कहा?

एजेंसी ने कहा कि उसके आवेदन फॉर्म और साथ दिए गए निर्देशों में हर इमिग्रेशन फायदे के लिए जरूरी दस्तावेजों और सबूतों के बारे में पहले से ही बताया गया है ताकि आवेदक आवेदन करते समय ही पूरी जानकारी और दस्तावेज जमा कर सकें।

यूएससीआईएस ने कहा कि यह पॉलिसी उसके कामकाज के तरीकों को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के लंबे समय से चले आ रहे नियमों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ती है, इमिग्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता को मजबूत करती है और आवेदकों के लिए ऐसे आवेदन करना मुश्किल बनाती है जिन्हें एजेंसी ने बेमतलब के (frivolous) फायदे वाले अनुरोध बताया है।

बाइडेन प्रशासन के समय क्या थी नीति?

नई गाइडलाइंस बाइडेन प्रशासन के समय अपनाई गई पॉलिसी में बदलाव को दिखाती हैं। उस पॉलिसी के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को आम तौर पर सलाह दी जाती थी कि वे बेनिफिट एप्लीकेशन को खारिज करने से पहले रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस जारी करें, भले ही फाइलिंग अधूरी हो या जमा करते समय जरूरी डॉक्यूमेंट्स न हों।

यूएससीआईएस के अनुसार, पहले के तरीके की वजह से अधूरी या काफी कमियों वाली एप्लीकेशन के कारण दूसरे पेंडिंग मामलों की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती थी। एजेंसी ने यह भी कहा कि इससे कुछ आवेदक अपनी मुख्य रिक्वेस्ट पर फैसले का इंतजार करते हुए उससे जुड़े इमिग्रेशन बेनिफिट (जैसे रोजगार की मंजूरी) पाने के लिए प्लेसहोल्डर एप्लीकेशन फाइल कर पाते थे।

एजेंसी ने अब अधिकारियों को यह अधिकार वापस दे दिया है कि वे उचित मामलों में आरएफई या NOID जारी किए बिना बेनिफिट रिक्वेस्ट को खारिज कर सकें। हालांकि, अगर अधिकारियों को लगता है कि फैसला लेने से पहले और सबूतों की जरूरत है तो वे आरएफई जारी करने का फैसला ले सकते हैं।

नई नीति के तहत इमिग्रेशन अधिकारी कौन से कदम उठा सकते हैं

फाइलिंग के समय योग्यता साबित न कर पाने वाली एप्लीकेशन को खारिज करना।
जरूरी शुरुआती सहायक सबूतों के बिना जमा की गई रिक्वेस्ट को रिजेक्ट करना।
जहां उन्हें लगे कि और डॉक्यूमेंट्स की जरूरत है वहां आरएफई जारी करना।

तुरंत लागू हुई नई नीति

एजेंसी ने कहा कि इन बदलावों से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने, केस प्रोसेस करने की गति बढ़ाने और बिना ठोस आधार वाले उन आवेदनों को कम करने में मदद मिलेगी जो पहले से जमा पेंडिंग मामलों (बैकलॉग) का बोझ बढ़ाते हैं।

यह पॉलिसी तुरंत लागू हो गई है और 5 अगस्त, 2026 को या उसके बाद दायर किए गए या पेंडिंग सभी इमिग्रेशन बेनिफिट अनुरोधों पर लागू होगी जब तक कि मौजूदा नियमों या USCIS पॉलिसी में कोई और प्रावधान न हो।

यह कदम यूएस इमिग्रेशन प्रक्रियाओं में किए गए हालिया बदलावों में से एक है, जिसका मकसद बेनिफिट देने के लिए तय मानकों को और सख्त बनाना है।

रोजगार-आधारित वीजा, परिवार-प्रायोजित ग्रीन कार्ड, स्टेटस में बदलाव या विस्तार, नागरिकता (नेचुरलाइजेशन) और अन्य इमिग्रेशन बेनिफिट चाहने वाले आवेदकों को अब यह पक्का करने के लिए ज़्यादा दबाव का सामना करना पड़ेगा कि उनके आवेदन जमा करते समय पूरे हों और उनमें सभी जरूरी दस्तावेज हों क्योंकि अधूरे आवेदनों को खारिज होने से पहले सुधारने का मौका शायद अब न मिले।

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