
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी के स्तर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने स्पष्ट किया कि टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियां और उनके प्रवर्तक सेबी के प्रकटीकरण एवं अनुपालन संबंधी नियमों के दायरे में आते हैं।
उनकी यह टिप्पणी टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों के बीच आई है। इनमें एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति और टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार में लिस्टिंग का मुद्दा भी शामिल है।
शनिवार को यहां भारत चेंबर इंवेस्टर्स फोरम के शुभारंभ कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में पांडेय ने कहा कि होल्डिंग कंपनी के स्तर पर कुछ मुद्दे हैं, क्योंकि वह वास्तव में सूचीबद्ध कंपनी नहीं है।
हालांकि, समूह की अन्य सूचीबद्ध कंपनियां लिस्टिंग आब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (एलओडीआर) के सभी मानकों का पालन करती हैं। इन सूचीबद्ध कंपनियों के साथ-साथ उनके प्रवर्तक भी सेबी के निर्धारित नियमों के अधीन हैं।
नियामक सभी घटनाक्रमों की लगातार निगरानी करता है हालांकि, सेबी चेयरमैन ने अपने बयान में समूह में किसी विशिष्ट कॉरपोरेट गवर्नेंस उल्लंघन या उसके खिलाफ किसी नियामकीय कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया।
सीएसई की वापसी के लिए शर्तें
कोलकाता स्टाक एक्सचेंज (सीएसई) को सक्रिय करने के लिए सालाना कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार, आधुनिक ऑनलाइन ट्रेडिंग, साइबर सुरक्षा, निगरानी और मजबूत क्लियरिंग एवं सेटलमेंट ढांचा जरूरी होगा। पर्याप्त ट्रेडिंग सदस्य भी चाहिए। वापसी के लिए वित्तीय देनदारियों का निपटारा और निवेशक भागीदारी बड़ी चुनौती होगी।



