
डड्डूमाजरा में वर्षों से जमा लाखों मीट्रिक टन पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण (बायो-माइनिंग) का कार्य वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। नवंबर 2019 से शुरू हुई इस परियोजना पर नगर निगम ने 101 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए।
करीब दो दशक तक चंडीगढ़ की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती रहे डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की पहचान अब पूरी तरह बदलने जा रही है। जहां कभी कचरे के पहाड़ से उठने वाली दुर्गंध और प्रदूषण लोगों की सबसे बड़ी चिंता थी, वहीं अब उसी स्थान पर शहर का नया ग्रीन फॉरेस्ट विकसित होगा।
नगर निगम ने वैज्ञानिक तरीके से लेगेसी वेस्ट के निस्तारण के बाद खाली हुई जमीन को चरणबद्ध ढंग से शहरी वन (अर्बन फॉरेस्ट) में बदलने की योजना शुरू कर दी है। अगले सात से आठ वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का नया केंद्र बनेगा।
डड्डूमाजरा में वर्षों से जमा लाखों मीट्रिक टन पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण (बायो-माइनिंग) का कार्य वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। नवंबर 2019 से शुरू हुई इस परियोजना पर नगर निगम ने 101 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। करीब पांच वर्षों तक चले अभियान में पुराने कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में वैज्ञानिक ढंग से संसाधित कर भूमि को दोबारा उपयोग योग्य बनाया गया। इसी के साथ शहर के सबसे बड़े पर्यावरणीय संकट को खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।
अब इस पूरी जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण शुरू हो गया है। पहले चरण में लगभग 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इनमें बांस, गुलाब, मोगरा, रातरानी, कपूर, विभिन्न छायादार एवं फलदार वृक्षों के साथ स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल होंगे। पौधरोपण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र को जैव विविधता बढ़ाने वाले प्राकृतिक शहरी वन के रूप में विकसित किया जाएगा। पेड़ों के विकसित होने के साथ यहां पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी प्राकृतिक आवास तैयार होगा।
नगर निगम की योजना के अनुसार भविष्य में यहां वॉकिंग ट्रैक, बैठने की जगह, ओपन एयर जिम, नेचर ट्रेल और पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों के लिए विशेष क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भी अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रीन कवर को मिलेगी नई उड़ान
चंडीगढ़ पहले ही देश के सबसे हरित शहरों में शामिल है। वर्ष 2013 में शहर का ग्रीन कवर 38 प्रतिशत था, जो 2022 में बढ़कर 45 प्रतिशत हुआ और अब 2026 में 51.6 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। डड्डूमाजरा में विकसित होने वाला यह नया शहरी वन शहर के ग्रीन कवर को और मजबूत करेगा। जिस स्थान को कभी प्रदूषण और दुर्गंध का प्रतीक माना जाता था, वही आने वाले वर्षों में शहर के ग्रीन लंग्स के रूप में स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ाव का नया केंद्र बनेगा।



