नायब सैनी के औद्योगिक विजन को धरातल पर उतार रहे डॉ. अमित अग्रवाल

हरियाणा को देश के अग्रणी औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विजन को धरातल पर उतारने में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कमिश्नर एवं सचिव के रूप में वह प्रदेश की निवेश रणनीति, औद्योगिक नीतियों और उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार करने से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत समझ और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश आकर्षित करना, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इस दिशा में डॉ. अग्रवाल की जिम्मेदारी निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नीतियों को प्रभावी क्रियान्वयन तक पहुंचाने की भी है।

पांच लाख करोड़ के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
हरियाणा सरकार की ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ प्रदेश के औद्योगिक विकास की प्रमुख पहल है। एक जून 2026 को इस नीति सहित 10 सेक्टोरल नीतियां लागू की गईं। इनके माध्यम से अगले पांच वर्षों में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

नीति के शुभारंभ कार्यक्रम में 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े 123 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। वहीं, मुंबई निवेश रोड शो में 66,821 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित 17 समझौते किए गए।
इन आंकड़ों के पीछे निवेशकों तक पहुंच बनाने और प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को सामने रखने के प्रयास हैं। हालांकि, डॉ. अग्रवाल और उनकी टीम की वास्तविक सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि कितने प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं, कितनी परियोजनाएं उत्पादन शुरू करती हैं और उनसे स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार मिलते हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस नीति को प्रदेश के आर्थिक विकास के अगले चरण का रोडमैप बताया है। सरकार का जोर निवेश प्रक्रिया सरल बनाने, निर्णय लेने में तेजी लाने और उद्योगों को मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध कराने पर है। विभाग के शीर्ष अधिकारी के रूप में डॉ. अग्रवाल की भूमिका इन प्राथमिकताओं को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने की है।

विदेशों में निवेश संबंध मजबूत करने की पहल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्वीडन और सिंगापुर यात्राओं के दौरान हुए निवेश संबंधी प्रयास हरियाणा की अंतरराष्ट्रीय निवेश रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्वीडन में प्रमुख औद्योगिक कंपनियों के साथ बैठकों के दौरान करीब 4,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिए सहमति बनी, जिससे 11,000 से अधिक रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई।
सिंगापुर दौरे के दौरान विभिन्न कंपनियों के साथ करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए सहमति बनी। इनमें स्वास्थ्य एवं वेलनेस क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये, जल उपचार एवं प्रबंधन में 1,500 करोड़ रुपये और शिक्षा क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं।

इन दौरों के दौरान निवेशकों, उद्योगपतियों और राजनयिकों को अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027’ में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया गया। अब जरूरी होगा कि इन संपर्कों को ठोस परियोजनाओं में बदलने के लिए निरंतर संवाद, समयबद्ध निर्णय और निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में उद्योग विभाग का समन्वय निर्णायक साबित हो सकता है।

तकनीक और एमएसएमई पर भी नजर
हरियाणा की औद्योगिक रणनीति केवल बड़े निवेश तक सीमित नहीं है। सिंगापुर की कंपनियों के सहयोग से पंचकूला, करनाल, हिसार, सोनीपत और रोहतक को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) तथा तकनीक आधारित कारोबार के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे गुरुग्राम से आगे अन्य शहरों में भी तकनीक आधारित आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बनेंगी।
वहीं, नई एमएसएमई नीति-2026 के तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने, पांच लाख से अधिक रोजगार अवसर पैदा करने और हरियाणा के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश के 14 लाख से अधिक छोटे उद्योगों को लाभ पहुंचाने की परिकल्पना इस नीति को व्यापक आर्थिक महत्व देती है।
बड़े उद्योगों, छोटे उद्यमों और तकनीक आधारित कारोबार के बीच तालमेल स्थापित करना औद्योगिक विकास को अधिक व्यापक बनाने के लिए जरूरी है। इसके लिए नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन और उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं का समय पर समाधान महत्वपूर्ण होगा।

एमबीबीएस से आईएएस तक का अलग सफर
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल का प्रशासनिक सफर भी उल्लेखनीय है। मूल रूप से जयपुर के निवासी डॉ. अग्रवाल ने प्रतिष्ठित एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की, लेकिन चिकित्सा के पेशे के बजाय भारतीय प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाया। उन्होंने चिकित्सक के रूप में निजी या सरकारी प्रैक्टिस नहीं की।

उनके पास नीति निर्माण और फील्ड प्रशासन, दोनों का व्यापक अनुभव है। वह राज्यपाल के सचिव, आबकारी एवं कराधान आयुक्त तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा गुरुग्राम में सहायक आयुक्त, हिसार में एसडीएम, पानीपत में अतिरिक्त उपायुक्त और फरीदाबाद में हुडा प्रशासक रहे। उन्होंने यमुनानगर, हिसार, पलवल, रोहतक और फरीदाबाद में उपायुक्त के रूप में भी सेवाएं दी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अतिरिक्त प्रधान सचिव के रूप में काम करने के साथ वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अतिरिक्त प्रधान सचिव-1 भी रह चुके हैं। 

अनुभव और प्रशासनिक दक्षता
डॉ. अग्रवाल के अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का उपयोग अब हरियाणा के औद्योगिक लक्ष्यों को परिणामों में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होगा। निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं तक पहुंचाना, उद्योगों की स्थापना में आने वाली बाधाएं दूर करना और युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करना आने वाले समय की प्रमुख चुनौतियां हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इन लक्ष्यों की सफलता सरकार के नेतृत्व, स्पष्ट नीतियों और प्रशासनिक क्रियान्वयन के तालमेल पर निर्भर करेगी। डॉ. अमित अग्रवाल इसी व्यवस्था की अहम कड़ी हैं। 

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