
सऊदी अरब ने एलान किया है कि वह लाल सागर यानी रेड सी में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों से व्यापारिक जहाजों को बचाना है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए 50 देशों को न्योता भेजा गया है। अभी यह तय नहीं है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। इसकी औपचारिक घोषणा जल्द हो सकती है।
किन देशों को भेजा गया न्योता
एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया, सूडान के अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी बुलावा गया है। कहा जा रहा है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। अमेरिका ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसके शामिल होने की संभावना है।
रेड सी में युद्धपोत करेंगे तैनात
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन में शामिल देश अपने युद्धपोत रेड सी और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में तैनात करेंगे। ये जहाज गश्त करेंगे और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेंगे। तेल टैंक और मालवाहक जहाज अकेले नहीं भेजे जाएंगे। उन्हें काफिले में भेजा जाएगा और साथ में वॉरशिप चलेंगे।
युद्धपोतों पर लगे एयर डिफेंस और रडार ड्रोन और मिसाइल हमलों को पहले ही मार गिराने की कोशिश करेंगे।ड्रोन और गश्ती विमान लगातार उड़ान भरेंगे ताकि हूती के लॉन्चिंग पॉइंट का पता चल सके।सभी देश रडार, सैटेलाइट और खुफिया जानकारी आपस में साझा करेंगे।
हूती लड़कों ने समुद्री नाकेबंदी का एलान किया
हूती लड़कों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का एलान किया था। उन्होंने कहा कि सऊदी पोर्ट का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर हमला हो सकता है। अब वे रेड सी से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस आइडिया को ईरानी अधिकारियों ने दिया था। इसमें चीनी जहाजों को छूट दी जा सकती है।
ट्रंप और वेंस की हुई बैठक
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से इमरजेंसी बैठक की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को युद्ध को और बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी रक्षा के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि हूतियों से निपटने में सऊदी सक्षम है और अभी अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है।
रेड सी क्यों है इतना जरूरी
रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया का करीब 30 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसके आने-जाने के सिर्फ 2 रास्ते हैं, बाल अल-मंदेब स्ट्रेट और स्वेज नहर। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव की वजह से सऊदी अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है।
अब होर्मुज और रेड सी दोनों में तनाव बढ़ने से दुनिया की 25 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि सऊदी अरब ने इस नए गठबंधन के जरिए समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने की कोशिश शुरू की है।



